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राष्ट्रवाद : मेरी नज़र में

राष्ट्रवाद : मेरी नज़र में

इस सर्द भरे मौसम में गर्माहट भरी जगह हो,धुंआ में लिपटी चाय हो,और क्या कहने जब इसके साथ आग उगलता मुद्दा हो. आग का तो पता नहीं मगर अभी एक मुद्दा है जो भरपूर नफरत उगल रहा है. इसे आप "राष्ट्रवाद" का नाम दे सकते है,मगर मैं इसे कुछ और कहूंगा. क्योकि जब मैं राष्ट्रवाद की परिभाषा ढूढ़ने इंटरनेट पर गया तो मुझे इसकी परिभाषा कुछ यूँ मिली ,"राष्ट्रवाद वह है जिसमे देश के राष्ट्रध्वज,राष्ट्रगान का स्वेच्छा से सम्मान करते हुए और सभी के अधिकारों की रक्षा करते हुए राष्ट्रभक्ति की भावना से देश की रक्षा की जाती है."
मगर क्या सचमुच राष्ट्रवाद की यह परिभाषा आज के परिवेश को देखते हुए सटीक बैठती है?
क्योकि आज देश में जिस प्रकार की देशभक्ति चल रही है,वो पाखंडी सी लगती है ,एक दौर वो था जब यह जात पात से  दूर,धर्म  से अलग रहती हुई क्रन्तिकारी सी लगती थी,किसी माँ की तरह  राष्ट्रवादिता "भगतसिंह" जैसे शूरवीर पैदा करती थी,मगर आज यह किसी शैतान सी लगती है जो धर्म के नाम पर गौ हत्याएँ करवाती है,जो इतनी असहिष्णु (intolerate)हो गयी की कलबुर्गी,पनसारे ,और गौरी लंकेश जैसी आज़ाद सोच को खा जाती है,कसूर सिर्फ  इतना सा था की इन्होने "एक सोच" विचारधारा का समर्थन नहीं किया।
एटीएम की लाइन में जबरदस्ती लगवाना, सिनेमाघरों में आपको राष्ट्रगान पर आपको अनिवार्य रूप से खड़े होना भी आज की पाखंडी राष्ट्रवाद के  उदाहरण है और अगर आप सवाल करते हो तो आप पर देशद्रोही का ठप्पा लगा देती है.

सफ़ेद कुर्ते ,लाल बत्तियों में घूमती सी राजनीति के बीच पिसती हुई यह राष्ट्रवादिता अपने देश के ही लोगो में धर्म के नाम पर इस कदर फर्क करने लग गयी की मुझे यह ज़र्मनी के क्रूर इतिहास की याद दिलाती है. वही इतिहास जब यहूदी होलोकास्ट हुआ जिसमे करोड़ो यहूदी मारे गए ,मुसेलिनी और हिटलर जैसे तानशाह अस्तित्व में आये. किसी को धर्म के नाम पर मारना कब से हमारे देश में राष्ट्रभक्ति बन गयी मेरी समझ के बाहर है.
विधालयो में तो हमे प्राथना करवाई जाती थी "सभी भारत के लोग मेरे भाई-बहन है ". क्या आज यह बदल चुकी है की "सभी भारत के लोग मेरे भाई-बहन है बशर्ते वो मेरे धर्म,मेरी जात के ही हो".
यह राष्ट्रवाद नहीं है यह राष्ट्रवाद का चौला ओढ़े वही गंदी राजनीती है जो बाबरी काण्ड करवा गयी , यह वही भीड़ वाला राष्ट्रवाद है जो कभी भी आप पर  हमला कर सकती  है , ज़रा संभल कर रहिएगा  इस पाखंडी सोच का कभी समर्थन ना करना , क्योकि शायद आप भी नहीं चाहते की आप की अगली पीढ़ी के लिए आप ज़र्मनी जैसा  काला इतिहास छोड़ जाए।। 

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