Headlines
Loading...
Ministry Of Utmost Happiness - रॉय की लेटेस्ट बुक पर मेरी पर्सनल राय !!

Ministry Of Utmost Happiness - रॉय की लेटेस्ट बुक पर मेरी पर्सनल राय !!

जब अरुंधति रॉय ने 1997 में उनकी नावेल "God of small things"के लिए मान  बुकर प्राइज जीता तो वो एक महान लेखिका के नाम से जानी गयी ,उससे पहले उनको एक Cynical फिल्म क्रिटिक कहा गया क्योंकि उन्होंने शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन की तीखी आलोचना की थी और कहा था कि "This is the great indian Rape trick ".
मान बुकर पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अरुंधति ने अपना रास्ता अलग रस्ते पर मोड़ दिया जहा उनको देशद्रोही कहा गया क्योंकि उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर अपनी राय एक तरफा रखी  जहा उन्होंने कश्मीर के लोगो का पक्ष लिया और भारतीय आर्मी पर वार किया , इसके अलावा जब वो लाल सलाम करती हुई बस्तर में पहुची तब भी उनकी तीखी आलोचना की गयी !!
इसके अलावा वो अलग अलग रूप से और भी कई मुद्दों से जुड़ती गयी जिसमे से एक है सरदार सरोवर प्रोजेक्ट !!
खेर यह पुरानी बाते है नयी बात यह है कि उनकी नई  बुक "Ministry of utmost happiness" लांच हो चुकी है .जिसको एक ओर से भरपूर सराहना मिल रही है वही दूसरी ओर से  इस बुक को उसी तरह देखा जा रहा है जिस तरह उनके कश्मीर  पर रखे गए पक्ष को देखा जाता है .
मैंने पांच  दिन लेकर यह बुक पढ़ी ,मुझे पसंद आयी मगर ज्यादा  पसंद  नही आयी . इस नावेल में देश में हो रहे और हो चुके वास्तविक मुद्दों को काल्पनिक किरदारों के द्वारा बतलाया गया है . बुक का शुरूआती अंश बहुत ही उम्दा है मगर क्या है मैं यहाँ नही बता सकता,अच्छा यह रहेगा की आप खुद खरीदे और खुद से पढ़े !!
इस बुक में और भी कई सारे मुद्दे कई सारे किरदारों के द्वारा बताए गए है जो शायद इसकी खासियत भी है और कमी भी है ,क्योकि बहुत सारे मुद्दों को अपनाने के चक्कर में किसी भी एक मुद्दे का स्पष्ट व्याख्यान नही कर पाती . इसमें कश्मीर  का मुद्दा भी है, आपातकाल भी है , सामाजिक मुद्दे भी है ,  मगर फिर भी कही न कही कुछ कमी खलती है !!
बुक को पढ़कर ऐसा लगा की अरुंधति राय कश्मीर के मुद्दे को एक तरफा पक्ष लेकर दिखा रही है  जैसा वो हर बार करती हैै,  जबकि सच यह है कि नुकसान जितना उधर हुआ उतना ही इधर भी हुआ है ,दुःख जितना उधर है उतना ही इधर भी है !!!
खेर मै तो यही कहना चाहता हु की बुक अच्छी है एक बार जरूर पढ़ो . आपको देश में हुए मुद्दों को अंदरूनी ना सही मगर काफी कुछ उनके बारे में पढ़ने को मिलेगा . वेसे भी किताबे पढ़ते रहना चाहिए क्योकि यह आपको कई अलग अलग मुद्दों ,कई अलग अलग लोगो ,देशो, संस्कृतियों से रूबरू करवाती है , फिल्मे भी कुछ हद तक यही काम करती है जो किताबे करती है मगर फिल्मो के दृश्य आपकी इमेजिनेशन को एक सिमित रेखा में रोक देती है जबकि किताबो के शब्दों से आप अपनी इमेजिनेशन से उस किताब की दुनिया को creat कर सकते है !!!!!!!!!!!!!!!!!
Add caption

0 Comments: