हम कितने मासूम है जो मीडिया ने बताया, जो लोगो ने बताया उसी को सच मान लिया. हर चीज़ के दो पहलु होते है चुनाव आपका होता है आपको कोनसा पहलु चुनना है. सच सिर्फ उतना नही होता जितना हम सुनते है और जो हमे दिखाया जाता है. कहते है सच कड़वा होता है और यह लोगो के गले से जल्दी से नीचे नही उतरता .
कश्मीर का सच क्या है ? क्यों यह स्वर्ग जैसी जगह जेहनुम्म में तबदील हो गयी. क्यों कश्मीरी पंडित कश्मीर से रुखसत हो गए ?
हैदर फिल्म में एक डायलॉग है ," न अब छोड़े हमें हिंदुस्तान ना अब छोड़े हमें पाकिस्तान ,कोई तो पूछे हमे हम क्या चाहते है ?,"
हैदर फिल्म को मैं एक साहसिक फिल्म मानता हूं. ये उन जख्मो पर सवाल करती है जो कभी उनसूलझे थे .
मुझे लगता है जब विशाल भारद्वाज इसे बना रहे तो शायद अपनी क्रिएटिविटी के चरम बिंदु पर थे. क्योकि शेक्सपियर के नाटक HEMLET पर इससे बेहतर फिल्म नही बन सकती थी . यह सिर्फ एक रिवेंज फिल्म नही है यह कश्मीर की अंदरूनी ज़िन्दगी को बयां करती है .
जब यह फिल्म रिलीज़ हुई तब कई लोगो ने इस पर आपत्ति जताई क्योकि शायद यह INDIAN ARMY की कश्मीर पर फैली हुकूमत को बयां करती है (ऐसा वे लोग सोचते है) ,मगर ये उनका सोचना गलत है क्योंकि यह सिर्फ AFSPA कानून पर सवाल उठाती है . कैसे कश्मीरियो के लिए बनाया गया एक कानून उनके लिए एक मसला हो गया . ( this is called CHUTZPAH) .
मणिपुर में इरोम शर्मिला ने इसके विरोध में 14 साल अनशन किया ,मगर यह Chutzpa बेशर्म ,गुस्ताख़ जैसे AFSPA कहा किसी के बस में आने वाला है .
यह फिल्म शाहिद कपूर के कैरियर में मील का पत्थर साबित हुई ,जिसने उसे filmfare दिलाया. पहली बार एहसास हुआ की शाहिद कपूर भी एक कलाकार भी है नही तो हम तो उसे नृत्यशाला का कोई छात्र समझ रहे थे .

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