"हंगामा " फिल्म में राजपाल यादव का एक संवाद है जिसमे वो कहता है कि "हम कोई मंदिर का घंटा है जो कोई भी आता है और बजा जाता है ". यह संवाद भारत में फिल्मो की स्थीति पर टिख बैठता है . कोई भी आता है और अपनी अपनी राजनीती पेल जाता है . अभी जिस तरह "पदमावती " पर पूरे भारत भर में राजनीती की जा रही है उसे देख कर तो लगता नही की भारत विकसित देश है और यह भी प्रतीत नही होता की भारत विकास की और बढ़ रहा है ! पहले इस फिल्म का विरोध सिर्फ एक जाती के लोग ही कर रहे थे मगर धीरे धीरे सभी लोग अपने अपने राजनीतिक हाथ सेकने में लगे हुए है ! जबकि पदमावती को सेंसर बोर्ड और कोर्ट दोनों से हरी झंडी मिल चुकी है मगर फिर भी कुछ लोग ,भीड़ में शामिल होकर खुद को भारत के कानून से बड़ा समझने लगा है ! सिनेमा घरों में तोड़ फोड़ हुई है , कई घंटों की मेहनत से बनाई गई एक कलाकार की पदमावती की रंगोली को कुछ लोगो की भीड़ ने तोड़ दिया , फिल्म के निर्देशक को थपड़ मारा गया और यह सब किया गया सिर्फ इस अफ्फाह पर की खिलजी और पदमावती के बीच को गाना फिल्माया गया है ! इसके बावजूद निर्देशक संजय लीला बंसाली ने अपने वीडियो में हाथ जोड़ कर विनती करकेे बताया कि फिल्म में ऐसा कुछ नही दिखाया गया , फिर भी शायद यह उन लोगो के लिए सुनहरा मौका है राजनीती करने के लिए तभी वो लोग पीछे हठने को तैयार नही है ! अब शायद निर्देशक खुद की गर्दन काट कर भी उनके सामने रख दे तो भी शायद उनके समझ में नही आएगी यह बात क्योकि राजनीती है ही ऐसी चीज़ . इस राजनीती ने तो कई जगहों को बंजर बना दिया , कई दंगे करवा चुकी यह राजनीती !!
दीपिका पादुकोण को दूसरे देश की बताया जा रहा है वो भी एक टुच्चे से नेता के द्वारा ! यह वही दीपिका पादुकोण है जो हॉलीवुड में जाकर काम करती है तो इस देश के लोगो को गर्व होता है , वाह रे दोगले लोगो !! सबसे बुरा तब लगता है जब कुछ लोगो की भीड़ देश में हंगामा मचा देती है और बहुत सारे लोगो की भीड़ सिर्फ तमाशा देखती रह जाती है ! सबसे बड़ी गलती है उन आम लोगो की जो सोचते है हमे क्या मतलब इससे ,हमारी लाइफ तो सही चल रही है मगर उनको समझना चाहिए पकिस्तान में जब तालिबान को अनदेखा किया गया तभी तो वो आज पूरे पाकिस्तान में अपने पैर पसार चुका है !!
फिल्मो का विरोध शुरू से ही होता रहा है और कला एक ऐसा सॉफ्ट स्पॉट है जिस पर हर कोई समय समय पर राजनीती कर जाता है ! ये राजनेता तो राजनीती में इस कदर बुरे है कि अगर उनका बस चले तो अपने घरवालों को बेच दे ,बात कड़वी है मगर सच है कि राजनीति ही इस देश को ले डूबेगी एक दिन !!
एक फिल्म को लेकर इतना विरोध किया जा रहा है , यह विरोध तब कहा चला जाता है जब किसान आत्महत्या करता है , जब किसी मुस्लिम की गौ हत्या करदी जाती है , जब किसी लड़की का बलात्कार कर दिया जाता है तब कहा चला जाता है यह विरोध !! भारत में 120 करोड़ लोग नही 240 करोड़ लोग है क्योंकि हर कोई दोगला है यहाँ !!
पिछले साल मार्टिन स्कोरसेसे की फिल्म " Silence " एक बहुत ही उम्दा फिल्म है मगर अगर ऐसा विषय लेकर फिल्म भारत में बन जाती तो पता नही पूरा भारत ही जल उठता जबकि फिल्म में वास्तविकता दिखाने के लिए कुछ ऐसे दृश्य है जो किसी पाखंडी का जरूर खून खोलवा दे !
मुझे अजीब लगता है जब मैं अपने कई मित्रो को देखता हूं जो गली के टुच्चे डॉन बनते है और जब ऐसे विषय पर कुछ बोलने की बात आती है तो चुप बैठ जाते है उनका सिर्फ एक ही मकसद होता है कि फेसबुक पर अच्छी अच्छी फोटो डालना और फोटो के साथ एक जबर लाइन लिखना !!!!!!
अभी हाल ही में दो कौड़ी का वेल्ला वकील कोर्ट में पेटिशन दायर करता है कि महात्मा गांधी के नाम के आगे से महात्मा शब्द हटा दिया जाए ! इसको सोचना चाहिए की अगर महात्मा गांधी नही होते तो तू आज अंग्रेजो का पिछवाड़ा साफ़ कर रहा होता ! क्या नही था महात्मा गांधी के पास ,पैसा , नौकरी , डिग्री सब था फिर भी उनके सच्चे आदर्श और उसूल ही थे की वो सब कुछ छोड़ छाड़ कर देश को आजाद कराने में लग गए !!
कहते है भारत विविधताओं का देश है अलग अलग जाती , भाषा , संस्कृतियां है यहाँ , शायद यही वजह होगी की यहाँ हर आदमी बटां हुआ है , कोई अपनी जाती के लिए जी रहा है , कोई अपनी भाषा को लेकर लड़ रहा है , कोई खुद को किसी नेता का भक्त बताता है तो कोई विरोध में लड़ रहा है . इन सबके बीच छूट जा रहे है हमारा भारत देश !!

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