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नया दौर का जासूस अपना वजूद बचता हुआ - jagga jasoos

नया दौर का जासूस अपना वजूद बचता हुआ - jagga jasoos

जग्गा जासूस का जब पहला ट्रेलर आया तब यह मुझे बहुत पसंद आया और शायद अधिकतर लोगो को यह पसंद आया होगा तब महसूस हुआ की क्यों इस फिल्म को बनने में चार साल लग गए। बहरहाल पिछले शुक्रवार को फिल्म रिलीज़ हो चुकी है फिल्म को मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली है मैंने फिल्म देखि है और मुझे बहुत पसंद आयी है।  मगर फिल्म के आकड़े देखकर बहुत दुःख हुआ जहा पहले दिन फिल्म की कमाई करीब 8 करोड़ थी , दूसरे दिन 11 करोड़ थी ,रविवार को बढ़कर 13 करोड़ हो गयी मगर सोमवार से कलेक्शन गिरते  ही चले गए।
कुछ क्रिटिक्स ने फिल्म को साल की सबसे बड़ी फ्लॉप घोषित  कर दिया।  मगर इस बेहतरीन फिल्म का यह हाल क्यों हुआ ,क्या फिल्म अच्छी नहीं थी (फिल्म बहुत बेहतरीन है),क्या फिल्म में हीरो अच्छा नहीं था (रणबीर कपूर , जो भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन कलाकार माने जाते है ), क्या फिल्म में गाने नहीं थे (फिल्म में करीब 15 गाने है ),क्या फिल्म दिखने में अच्छी नहीं थी (फिल्म में रवि बर्मन की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी है ), क्या फिल्म के निर्देशक से कोई चूक हो गयी (अनुराग बासु ,जिन्होंने बर्फी,गैंगस्टर,लाइफ इन मेट्रो जैसी बेहतरीन फिल्मे बनायीं है ), तो क्या ऐसा था जो इस फिल्म को ले डूबा
                                                                 I think 
ऐसी फिल्म देखने के लिए भारतीय दर्शक अभी तक परिपक्व नहीं हुआ,आज भी अगर आप टीवी पर कोई फिल्म चैनल उठाकर  देखोगे तो अधिकतर जगह साउथ की फिल्म दिखाई जा रही है जिसमे फिल्म का हीरो एक मुक्के में 100 -150 लोगो को हवा में उड़ा देता है और देखने वाली बात यह है की उन फिल्मो की TRP  भी  अच्छी आती है,  तो ऐसे दर्शको से क्या उम्मीद करोगे की वह जग्गा जासूस जैसी म्यूजिकल फिल्म को देखने जाएंगे जिसमे कोई आइटम सांग नहीं है ,जिसमे हीरो जिगर वाला नहीं है।

फिल्म दो तरह की होती है एक जो दर्शको की फ़रमाइश के अनुसार बनायीं जाती है जिसमे मस्त 2-3 आइटम सांग होते है ,जिसमे हीरो गाड़िया हवा में उड़ा रहा है ,दूसरी वो जो दर्शको को समझाने के लिए उनकी सोच को विस्तारित करने के लिए उनको नया सिनेमा से रूबरू करवाने के लिए बनायीं जाती है प्राय ऐसी फिल्मे भारत में कम ही चल पाती है।

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर जैसी जानदार फिल्म जिसने बॉलीवुड की स्टीरियोटाइप हवा का ही रुख मोड़ दिया वो भी अपनी कमाई निकालने को तरस गयी थी ,और भी कई ऐसी फिल्मे है जो क्रिटिक के द्वारा सराही गयी मगर कमाई के बाजार में टिक नहीं सकी।

बहरहाल मुद्दे पर आते है की जग्गा जासूस जैसी अच्छी फिल्म भी क्यों तरस गयी कमाई करने के लिए।  यह बात सही है की अनुराग बासु वो मैजिक नहीं ला पाए जो उन्होंने बर्फी में किया था मगर फिल्म की बेहतरीन सिनेमॅटोग्रफी ,म्यूजिक,एक्टिंग ,फिल्म का कैनवास जो हम टिनटिन और इंडिआना जोंस में देखा करते थे वो सब इसमें सब है. कुछ दर्शको का कहना है की फिल्म बोरिंग है, फिल्म बहुत लम्बी है, फिल्म में जयादा गाने फिल्म को धीमा कर देते है ,मगर मैं बताना चाहूंगा की फिल्म एक ऐसे लड़के के बारे में है जो हकलाता है ,और अपनी बात गाना गाकर कहता है जिससे की वो हकलाए नहीं। हॉलीवुड में ऐसी म्यूजिकल फिल्मे बनती रही है sound of music ,chicago oliver . जग्गा जासूस जैसी फिल्म अपने आप में नए दौर की फिल्म में भारतीय सिनेमा  लिए।
फिल्म के शुरुआत में ही अगर आपको यह बात समझ में आ जाती है तो यह फिल्म आपको बहुत पसंद आएगी और अगर आप को नहीं आती समझ में तो आप बोर होकर अपनी सीट छोड़ देंगे।
मेरे कई दोस्त फिल्म देखने के लिए excited थे उन्होंने देखि भी मगर सिनेमा हॉल में नहीं पायरेसी पर।  भारत में फिल्म देखने वालो की आधी से भी कम संख्या सिनेमा हॉल तक पहुँचती है वो सब पायरेसी का इंतज़ार  कर रहे होते है।  यही कारण है की यहां अधिकतर फिल्मे फ्लॉप हो जाती है।  वैसे भी  भारीतय सिनेमा जैसे तैसे चल रहा है ,एक दिन अपनी यह भी अच्छी फिल्मो की तरह अस्तित्व में रहने का वजूद ढूंढता हुआ सहीद हो जायेगा हो जायेगा !!!!!!!!!!



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