मेरा ही शहर मुझसे अजीब हो गया
जब मैं पाई पाई का मोहताज हो गया ,
जब मैं पाई पाई का मोहताज हो गया ,
जिस गलियों , सड़को पे घुमा पंख फैला कर
आज वही मैं घूम रहा हु हाथ फैला कर ,
आज वही मैं घूम रहा हु हाथ फैला कर ,
तलाश थी मुझे काम और काज की
नही मिला तो मैं हताश हो गया !!
नही मिला तो मैं हताश हो गया !!
उम्मीद थी की अभी तो मेरा शहर बचा है
मगर मुझे कहा पता ,इसमें अब पहले जैसा कुछ नही बचा है !!
मगर मुझे कहा पता ,इसमें अब पहले जैसा कुछ नही बचा है !!

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