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इन्तेहाँ हो गयी इंतज़ार की

इन्तेहाँ हो गयी इंतज़ार की

अगर कोई मुझसे पूछे की दुनिया का सबसे मुशिकल काम कोनसा है ?
तो मैं कहूंगा Waiting.
हां इंतज़ार .
 मेरे मायने में दुनिया का सबसे उबाऊ ,थका देने वाला काम इंतज़ार करना है.
ग़ालिब भी कह गए है ,"जो ना करना था वही करा गये तुम , इंतेज़ार !!
अंग्रेजी में waiting मतलब जो वेटिंग करता है वो वेटर . माफ़ कीजियेगा यह सिर्फ जोक है और इसे जोक ही रहने दीजियेगा ,एन्वे ही तित्तर न बनाइयेगा !!


इंतज़ार बड़ा बोरिंग काम है चाहे वो गर्लफ्रेंड का नुक्कड़ पर इंतज़ार करना हो या फिर Questions के answers ना आने  पर परीक्षा हाल से बाहर निकलने का इंतज़ार. या तो किसी तपाऊ फिल्म के खत्म होने का इंतज़ार या फिर ज़िन्दगी में सही किस्मत का आने का इंतज़ार !!
तुम्हारे खर्चो में हम कंगाल बन गए 
इस तरह इंतज़ार किया तुम्हारा की कंकाल बन गए 

इंतज़ार और समय की बड़ी दुश्मनी है या यूं कहें कि इंतज़ार उस दीमक की तरह है जो हमारी ज़िन्दगी के अनमोल समय को खा जाता है . इंतज़ार करते वक़्त हम कुछ नही कर रहे होते सिवाय इंतज़ार के. इंतज़ार में वेसे भी कुछ करने का मन नही करता . ज़रा समय की कीमत उस आदमी से पूछो जिसकी आखिरी साँसे चल रही हो वो हर एक पल को खुशनुमा बना देना चाहता है वो हर पल को बेहतरीन तरीके से जीना चाहता है .

कभी कभी हम इंतज़ार में Observer बन जाते है जैसे हम कही सड़क किनारे किसी का इंतज़ार कर रहे होते है तो हम आती जाती गाड़ियों को ,लोगो को observe करने लगते है . तो इसका मतलब यह है कि इंतज़ार एक शानदार काम है .शायद हां . बसर्ते आप उस इंतज़ार की घडी का खुल कर मज़ा ले.
अब आप पूछेंगे की मज़ा कैसे ले इंतज़ार का ?
मोबाइल क्रांति आने से पहले लोग इंतज़ार करते समय खुद के कई काम निपटा लेते थे या फिर अगर किसी पब्लिक place में इंतज़ार कर रहे है तो किसी पास बैठे जनाब से बतिया लेते थे . बातो बातो में समय का पता नही चलता था और साथ में कुछ जान पहचान हो जाती थी. तभी तो उस वक़्त के लोग सोशल थे मगर आज यह सोशल गिरी सिर्फ मोबाइल तक रह गयी है . आपकी पूरी सोशल लाइफ, आपका पूरा समाज आपकी हतेली में धरा रह गया है .
अगर आप आज फेसबुक या किसी सोशल साइट पर एक्टिव नही है तो आप सोशल नही है ऐसी विचारधारा हो गयी है लोगो की . भला होएगी भी क्यों नही . सारा समाज ऑनलाइन आ गया है .इस बदलते परिवेश में सब कुछ कंप्यूटर ,मोबाइल ,टेबलेट में समां गया है .लोगो को सारी सुविधाएं इन्टरनेट पर मिल जाती है . 

सबसे ज़ालिम तो टीवी पर आने वाले सास बहू के सीरियल है जो बने ही है इंतज़ार कराने के लिए . पांच मिनट के एपिसोड को रबर की तरह आधा घंटा खिंच लेते है और फिर सिमरन का दूसरा पति कोन है यह दिखाने के लिए अगले एपिसोड का इंतज़ार करवाते है।  



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